‘तीन महीने में नहीं सीखी मराठी तो लाइसेंस होगा कैंसिल…’, महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री की दो टूक – maharashtra auto rickshaw taxi drivers mandatory marathi language license action ntcpvp


महाराष्ट्र में ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा को लेकर राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाया है. महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने कहा है कि जो रिक्शा और टैक्सी चालक मराठी सीखने से इनकार करेंगे और इसे लेकर मनमानी करेंगे, उनके खिलाफ कानून के दायरे में कार्रवाई की जाएगी. एक महीने का नोटिस और इसके बाद तीन महीने के लिए लाइसेंस निलंबित किए जाने के बावजूद मराठी नहीं सीखने पर चालक का लाइसेंस रद्द किया जा सकता है.

परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने बताया कि महाराष्ट्र में पिछले 105 दिनों से टैक्सी और रिक्शा चालकों को मराठी सिखाने का अभियान चलाया जा रहा है. अब तक करीब 1 लाख 65 हजार ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालक मराठी सीख चुके हैं और उन्हें इसके प्रमाणपत्र भी दिए गए हैं.

सरनाईक ने कहा कि महाराष्ट्र के साथ-साथ दूसरे राज्यों से आने वाले लोगों को भी यहां रोजगार मिलना चाहिए और मुंबई में सभी को समायोजित करने की क्षमता है. हालांकि, उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र की भाषा मराठी है और उसका प्रचार-प्रसार होना चाहिए.

‘मराठी नहीं सीखेंगे’ कहने वाले चालकों पर सख्ती

परिवहन मंत्री ने कहा कि कुछ रिक्शा और टैक्सी चालकों ने वीडियो बनाकर कहा है कि वे मराठी नहीं सीखेंगे और सरकार को जो करना है, कर ले. उन्होंने इसे ‘मुजोरी’ (मुंहजोरी) बताते हुए कहा कि इस तरह का रवैया बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. उन्होंने कहा कि ऐसे चालकों को पहले एक महीने का नोटिस दिया जाएगा. इसके बाद भी मराठी नहीं सीखने पर उनका लाइसेंस तीन महीने के लिए निलंबित किया जाएगा. अगर इसके बावजूद चालक मराठी नहीं सीखता है तो सरकार यह मानेगी कि वह मराठी भाषा से नफरत करता है और ऐसी स्थिति में उसका लाइसेंस रद्द किया जाएगा.

सरनाईक ने यह भी कहा कि अब ड्राइविंग लाइसेंस मिलने के बाद चालक को दिए जाने वाले बैज के लिए मराठी बोलने की क्षमता की जांच की जाएगी. चालकों से पूछा जाएगा कि क्या उन्हें मराठी बोलनी आती है और इसकी जांच के बाद ही बैज जारी किया जाएगा.

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RTO करेगा रैंडम चेकिंग, होगी वीडियो रिकॉर्डिंग

परिवहन विभाग इस व्यवस्था का पालन सुनिश्चित करने के लिए आरटीओ के ‘वायुवेग पथक’ के जरिए रैंडम चेकिंग भी कराएगा. इस जांच की वीडियो रिकॉर्डिंग की जाएगी. सरनाईक ने कहा कि सरकार कानून के दायरे में रहकर कार्रवाई करेगी और किसी भी तरह की धमकी या दबाव को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

पुराने ऑटो-टैक्सी परमिट की भी होगी जांच

महाराष्ट्र सरकार अब पुराने ऑटो-रिक्शा और टैक्सी परमिट की वैधता की भी जांच कराने जा रही है. इसके लिए परिवहन विभाग की ओर से विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया जाएगा. जांच की जिम्मेदारी विभागीय आयुक्त को दी जाएगी.

SIT यह पता लगाएगी कि पुराने ऑटो-रिक्शा और टैक्सी परमिट वैध हैं या नहीं. जांच पूरी करने के लिए दो महीने का समय दिया जाएगा और इसके बाद रिपोर्ट महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री को सौंपी जाएगी.

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