सहारनपुर कलेक्ट्रेट की 70 साल पुरानी मस्जिद पर चलेगा बुलडोजर! भड़के इमरान मसूद, कहा- नफरती चिंटू कर रहे माहौल खराब – Bulldozer action on 70 year old mosque at Saharanpur Collectorate Imran Masood angry hate mongering lclam


UP News: सहारनपुर में नगर मजिस्ट्रेट की अदालत ने कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित लगभग 70 साल पुरानी मस्जिद के निर्माण को सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा घोषित करते हुए उसे 30 दिन के भीतर हटाने का आदेश जारी किया है. बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए न्यायालय ने यह बड़ा फैसला सुनाया. इस प्रशासनिक आदेश के तुरंत बाद शुक्रवार को कांग्रेस सांसद इमरान मसूद खुद मस्जिद परिसर पहुंचे. उन्होंने मालिकाना हक के दस्तावेजों और वर्ष 1911 के बिजली बिल का हवाला देकर इस पूरे फैसले को न्यायिक के बजाय प्रशासनिक एजेंडा करार देते हुए सीधे अदालत में चुनौती देने की बात कही है.

नगर मजिस्ट्रेट का आदेश और भारी-भरकम जुर्माना

अदालत ने कलेक्ट्रेट परिसर की खसरा संख्या-539 की 315 वर्ग मीटर जमीन पर बनी मस्जिद को पूरी तरह अवैध माना है. कोर्ट ने न केवल 30 दिनों के भीतर इस ढांचे को हटाने के निर्देश दिए हैं, बल्कि मस्जिद पक्ष पर 6 करोड़ 41 लाख 65 हजार 565 रुपये का भारी जुर्माना भी ठोंका है. यदि तय समय में मस्जिद नहीं हटाई गई, तो प्रशासन बलपूर्वक बेदखली और जुर्माने की वसूली करेगा. यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब बजरंग दल के पूर्व नेता ने शिकायत की कि मस्जिद परिसर में डाकघर चल रहा है और कमरे किराये पर दिए गए हैं.

खसरे और खेवट पर सांसद इमरान मसूद का तर्क

बकौल इमरान मसूद- “यह कोई जुडिशल आर्डर नहीं है. आपने इश्यूज फ्रेम किए बिना ही फैसला सुना दिया. खसरे से सिर्फ जमीन का स्टेटस पता चलता है, मिल्कियत नहीं. मालिकाना हक खेवट से तय होता है.” 

मसूद ने दावा किया कि खेवट में वाहिद खान और याकूब खान का नाम दर्ज है, जो इस जमीन के असली जमींदार थे. मस्जिद अपनी निजी जमीन पर खड़ी है और प्रशासन को पहले कलेक्ट्रेट की मिल्कियत साबित करनी चाहिए. उनके पास 1911 का बिजली बिल भी है.

मंदिर-मजीद का जिक्र और नफरत की राजनीति का आरोप

सांसद इमरान मसूद ने तीखा रुख अपनाते हुए कहा कि कलेक्ट्रेट परिसर के भीतर एक मंदिर भी स्थापित है. उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि आज अगर मस्जिद पर बुलडोजर चलाया जा रहा है, तो कल को मंदिर पर भी बुलडोजर चलाया जा सकता है. उन्होंने आरोप लगाया कि आम जनता को न तो मंदिर से कोई दिक्कत है और न ही मस्जिद से, बल्कि कुछ नफरती चिंटू इस तरह की राजनीति कर माहौल खराब कर रहे हैं. मस्जिद पक्ष अब इस मामले को लेकर ऊपरी अदालत का रुख करेगा.

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