घर वालों की डांट खाई, बातें सुनीं पर थमी नहीं… 18 की उम्र में मर्चेंट नेवी तक पहुंची कश्मीर की बेटी – tanvi sharma merchant navy success jammu kashmir self study edmm


जम्मू-कश्मीर के राजौरी की रहने वाली 18 वर्षीय तन्वी शर्मा ने 12वीं के बाद ऐसा करियर चुना, जिसके बारे में कम ही छात्र सोचते हैं. फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथ्स और बायोलॉजी (PCMB) की छात्रा रहीं तन्वी के पास NEET और JEE जैसे कई विकल्प थे, लेकिन उन्होंने मर्चेंट नेवी में जाने का फैसला किया. खास बात यह है कि उन्होंने सिर्फ एक महीने की सेल्फ-स्टडी के दम पर परीक्षा पास की और अब अगस्त में उनकी जॉइनिंग होने वाली है.

नीट-जेईई नहीं, कुछ अलग करने का था सपना

तन्वी ने एएनआई को द‍िए इंटरव्यू में बताय कि 12वीं के बाद उनके सामने मेडिकल और इंजीनियरिंग जैसे कई रास्ते खुले थे. लेकिन वह ऐसा करियर चुनना चाहती थीं, जिसे देखकर आने वाली पीढ़ियां प्रेरित हों. उनका कहना है कि वह अपने राज्य, स्कूल और परिवार का नाम रोशन करना चाहती थीं.

तन्वी ने मर्चेंट नेवी के बारे में जानकारी जुटानी शुरू की. पूरी जानकारी मिलने के बाद उन्होंने प्रशिक्षण के लिए टीएस चाणक्य से जुड़े संस्थान में दाखिला लिया. अब उनका चयन लॉरेल शिप मैनेजमेंट कंपनी में हो चुका है और अगस्त में वह जॉइन करेंगी.

सिर्फ एक महीने की सेल्फ-स्टडी से मिली कामयाबी

तन्वी के मुताबिक, उन्होंने परीक्षा की तैयारी के लिए किसी कोचिंग का सहारा नहीं लिया. 12वीं के बाद उन्होंने खुद को सिर्फ एक महीने का समय दिया और सेल्फ-स्टडी के जरिए तैयारी की. उन्होंने बताया कि परीक्षा का सिलेबस मुख्य रूप से 11वीं और 12वीं के विषयों पर आधारित था.

परिवार ने किया था मना, कई शहरों के लगाने पड़े चक्कर

तन्वी के लिए यह सफर आसान नहीं था. उन्होंने बताया कि शुरुआत में परिवार के कई लोग इस फैसले के खिलाफ थे. परीक्षा देने के लिए उन्हें दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और गोवा जैसे शहरों तक जाना पड़ा. कई बार मुश्किलें आईं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. उनका कहना है कि हर क्षेत्र में चुनौतियां आती हैं और जो उनसे लड़कर आगे बढ़ता है, वही असली विजेता बनता है.

तन्वी अपनी सफलता का सबसे बड़ा श्रेय अपनी मां को देती हैं. उनके मुताबिक, जब साथ देने वाला कोई नहीं था, तब उनकी मां हर कदम पर उनके साथ खड़ी रहीं. वह उन्हें अलग-अलग शहरों में परीक्षा दिलाने ले गईं और लगातार उनका हौसला बढ़ाती रहीं. तन्वी ने अपने स्कूल के प्रिंसिपल का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि प्रिंसिपल हमेशा उन्हें मेहनत और निरंतरता बनाए रखने के लिए प्रेरित करते थे.

‘सपने पूरे करने के लिए कम्फर्ट जोन छोड़ना पड़ता है’

तन्वी का मानना है कि केवल किताबों, शिक्षकों या दूसरों की बातों से सफलता नहीं मिलती. इसके लिए खुद के भीतर जुनून और मेहनत करने का जज्बा होना जरूरी है. उन्होंने छात्रों से कहा, ‘अगर आपके पास लक्ष्य है, तो उसके लिए लड़ना पड़ेगा. कभी-कभी नींद और आराम भी छोड़ना पड़ता है, क्योंकि सपने कम्फर्ट जोन में पूरे नहीं होते.’

राजौरी की रहने वाली तन्वी ने खास तौर पर लड़कियों से कहा कि उन्हें किसी भी मुश्किल से घबराना नहीं चाहिए. उन्होंने कहा कि अक्सर लड़कियों को आगे बढ़ने से रोका जाता है, लेकिन अगर इरादा मजबूत हो तो हर मंजिल हासिल की जा सकती है.

तन्वी ने कहा कि आने वाले वर्षों में वह और भी लड़कियों को अपने सपने पूरे करते हुए देखना चाहती हैं. उनका संदेश साफ है कि अगर इरादा मजबूत हो, तो रास्ते खुद बन जाते हैं.

—- समाप्त —-




Leave a Comment