कोई हाफिज सईद का ‘गुलाम’, कोई आतंकवाद का हिमायती… खुद के नेता खोल रहे पाकिस्तान की पोल – pakistan terrorism hafiz sayeed bilawal bhutto khwaza asif sheikh rashid ntc mnrd


पाकिस्तान आतंकवाद से अपने रिश्ते को लेकर चाहे जितनी बार सफाई दे, उसके अपने नेताओं के बयान ही उसकी कलई खोलते रहे हैं. कभी आतंकियों को ट्रेनिंग देने की बात सामने आती है, कभी उन्हें ‘हीरो’ बताने वाले बयान आते हैं और कभी यह स्वीकार किया जाता है कि आतंकवाद पाकिस्तान के अतीत का हिस्सा रहा है.

पाकिस्तान बाज नहीं आता, लेकिन जब उसके अपने नेताओं की जुबान खुलती है तो कई पुराने दावों की कलई खुलते देर नहीं लगती. बीते दिन ही पाकिस्तान के एक पूर्व मंत्री ने अपने आपको लश्कर आतंकी चीफ हाफिज सईद का गुलाम बताया. आइए जानते हैं, कब-कब पाकिस्तान ने दुनिया के सामने  अपने ही दावों की पोल-पट्टी खोली है.

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जब ख्वाजा आसिफ ने कुबूला पाकिस्तान का डर्टी वर्क

अप्रैल 2025 में पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने एक मीडिया संस्थान को दिए इंटरव्यू में पाक के पुराने आतंकवादी नेटवर्क से रिश्तों पर खुलकर बात की. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने करीब तीन दशकों तक अमेरिका और पश्चिम के लिए ‘डर्टी वर्क’ किया.उनका इशारा सोवियत-अफगान युद्ध और उसके बाद 9/11 के दौर में आतंकवादी और मिलिटेंट समूहों को समर्थन देने की नीति से था. हालांकि, उनके बयान में अमेरिका और पश्चिम की भूमिका पर भी जोर था.

बिलावल भुट्टो: ‘पाकिस्तान का अतीत रहा है’

इसके कुछ ही दिनों बाद 1 मई 2025 को मीडीया से हुई बातचीत में पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी से ख्वाजा आसिफ के बयान पर सवाल पूछा गया. उन्होंने कहा कि यह कोई रहस्य नहीं है कि पाकिस्तान का अतीत रहा है. साथ ही उन्होंने दावा किया कि आतंकवाद की कई लहरों का सामना करने के बाद पाकिस्तान ने इससे निपटने के लिए आंतरिक सुधार किए हैं.

इससे भी पहले, अक्टूबर 2015 में पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति और सेना प्रमुख परवेज मुशर्रफ ने एक इंटरव्यू में कहा था कि 1990 के दशक में पाकिस्तान ने लश्कर-ए-तैयबा समेत कई संगठनों को समर्थन और ट्रेनिंग दी थी. उन्होंने यह भी कहा कि उस दौर में ओसामा बिन लादेन, जलालुद्दीन हक्कानी और दूसरे मिलिटेंट पाकिस्तान के हीरो माने जाते थे, लेकिन बाद में वही विलेन बन गए.

शेख राशिद और हाफिज सईद के साथ मंच

पाकिस्तान के पूर्व गृह मंत्री शेख राशिद अहमद भी हाफिज सईद से नजदीकी को लेकर विवादों में रहे हैं.जनवरी  2012 में रावलपिंडी की डिफा-ए-पाकिस्तान काउंसिल रैली में  राशिद ने कहा था कि वह सईद के गुलाम बन गए हैं. उसी मंच पर सईद समेत कई कट्टरपंथी नेताओं ने भाषण दिए थे. बाद में 2012 में राशिद को अमेरिका के ह्यूस्टन एयरपोर्ट पर सईद और लश्कर-ए-तैयबा से संभावित संबंधों को लेकर पूछताछ के लिए रोका भी गया था.

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नवाज शरीफ ने 26/11 पर उठाया था सवाल

मई 2018 में पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने Dawn को दिए इंटरव्यू में पाकिस्तान में सक्रिय मिलिटेंट संगठनों और 26/11 मुंबई हमलों के मुकदमे पर सवाल उठाया था. उन्होंने पूछा था कि क्या गैर-राज्य तत्वों को सीमा पार कर मुंबई में लोगों को मारने की अनुमति दी जानी चाहिए. उनके बयान के बाद पाकिस्तान में राजनीतिक तूफान खड़ा हो गया और उन्हें अपने ही देश में आलोचना का सामना करना पड़ा.

इन बयानों में हर नेता का संदर्भ और राजनीतिक नजरिया अलग था.लेकिन एक बात साफ है, की पाकिस्तान पर आतंकवाद को लेकर लगते आरोपों के बीच उसके अपने नेताओं के कई पुराने बयान उसके दावों से बिल्कुल अलग तस्वीर पेश करते हैं. पाकिस्तान अक्सर आतंकवाद में अपनी भूमिका से इनकार करता रहा है और कई मौकों पर जिम्मेदारी भारत या दूसरे देशों पर डालता रहा है। लेकिन जब सवाल उसके अपने नेताओं के बयानों का आता है, तो उसके लिए इन पुराने रिकॉर्ड्स को नजरअंदाज करना मुश्किल है.

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