इंडोनेशिया में ओ३म्-ओ३म्, PM मोदी और प्रबोवो ने प्रांबानन मंदिर के जीर्णोद्धार प्रोजेक्ट का किया उद्घाटन – indonesia prambanan temple PM modi prabowo launch restoration project ntc ntyv


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने बुधवार को योग्याकार्ता में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल ‘प्रम्बानन मंदिर’ के जीर्णोद्धार प्रोजेक्ट का संयुक्त रूप से उद्घाटन किया. ये द्विपक्षीय सांस्कृतिक सहयोग में एक अहम पड़ाव है. प्रधानमंत्री ने इस प्राचीन मंदिर में पूजा-अर्चना की. इस दौरान में पूरी तरह भक्ति में लीन नजर आए. इसके बाद पीएम ने वहां मौजूद अधिकारियों से बातचीत की.

इस पूरी पुनरुद्धार परियोजना को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा इंडोनेशिया के संस्कृति मंत्रालय और इंडोनेशियन हेरिटेज इंस्टीट्यूट के साथ मिलकर संयुक्त रूप से संचालित किया जा रहा है. भारत की ‘एक्ट ईस्ट नीति’ और ‘महासागर विजन’ के तहत इस सांस्कृतिक साझेदारी को ठोस तकनीकी सहयोग में बदलने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है.

ASI करेगी पुनर्निर्माण

PM मोदी की इस मंदिर यात्रा की नींव राष्ट्रपति प्रबोवो के साल2025 के भारत दौरे के समय जारी संयुक्त बयान में ही रखी गई थी. इस ऐतिहासिक परियोजना के तहत एएसआई (ASI) मंदिर के पुनर्निर्माण के लिए अपनी विशेष ‘एनास्टाइलोसिस तकनीक’ अपना रही है.

इस तकनीक में मंदिर को उसके ही मूल पत्थरों का इस्तेमाल करके दोबारा मूल स्वरूप में खड़ा किया जाता है. ये शुरुआत साल 2026-27 में हो रही है जो गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर के साल 1927 के जावा और प्रांबानन आगमन का शताब्दी वर्ष भी है.

संजय वंश के राजा ने कराया था निर्माण

प्रांबानन मंदिर परिसर शहर लगभग 17 किलोमीटर उत्तर पूर्व में स्थित है. इस विशाल मंदिर संकुल का निर्माण काल लगभग 850 ईस्वी माना जाता है, जिसे संजय वंश के राजा राकाई पिकातन ने निर्मित कराया था. ये इंडोनेशिया का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर है जो त्रिमूर्ति यानी भगवान शिव, भगवान विष्णु और भगवान ब्रह्मा को पूरी तरह समर्पित है. एक समय में इस पूरे भव्य परिसर के अंदर लगभग 240 मंदिर मौजूद थे.

दीवारों पर उकेरी गई है पूरी रामायण कथा

इस पूरे प्रांबानन क्षेत्र में सेवु, बुब्रह और लुम्बुंग समेत 500 से अधिक मंदिर स्थित हैं. परिसर में मुख्य शिव मंदिर लगभग47 मीटर ऊंचा है, जो इंडोनेशिया के सबसे ऊंचे प्राचीन धार्मिक स्मारकों में गिना जाता है. यहां त्रिमूर्ति के अलावा उनके वाहनों के भी अलग मंदिर बने हैं. इन मंदिरों का निर्माण दक्षिण भारत की प्रसिद्ध पल्लव-चोल शैली से पूरी तरह प्रेरित है, जिसमें ऊंचे विमान, बड़े प्रांगण और वास्तु शास्त्र की मंडल अवधारणा साफ नजर आती है. सबसे खास बात ये है कि मंदिर की दीवारों पर भगवान राम के वनवास से लेकर रावण वध तक की पूरी रामायण कथा पत्थरों पर बहुत ही खूबसूरती से उकेरी गई है.

यूनेस्को की विश्व धरोहर लिस्ट में शामिल है मंदिर

ये ऐतिहासिक मंदिर परिसर सदियों तक उपेक्षा का शिकार रहने के कारण पूरी तरह वीरान पड़ा रहा था, जिसे 19वीं सदी की शुरुआत में ब्रिटिश पुरातत्वविदों द्वारा फिर से खोजा गया. साल 1990 में यूनेस्को ने प्रांबानन को विश्व धरोहर स्थल घोषित किया था. इस मंदिर के संदर्भ में एक स्थानीय लोककथा भी बहुत प्रचलित है. राजकुमारी रोरो जोंगग्रांग की कथा के अनुसार, उन्हें श्राप देकर पत्थर की मूर्ति यानी ‘दुर्गा महिषासुरमर्दिनी’ बना दिया गया था जो आज भी मुख्य शिव मंदिर के अंदर सुरक्षित मौजूद हैं.

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