US के हमले, ट्रंप की धमकी और IAEA की चेतावनी… ईरान पर अमेरिका ने बनाया चौतरफा दबाव – un nuclear watchdog demands iran cooperation nuclear sites ntc mkg


मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव, अमेरिकी एयरस्ट्राइक, ईरान के जवाबी हमलों और ट्रंप की धमकी के बीच परमाणु निगरानी संस्था इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) ने तेहरान पर दबाव बढ़ा दिया है. वियना में IAEA के 35 सदस्यीय बोर्ड ऑफ गवर्नर्स ने एक अहम प्रस्ताव पारित कर ईरान से न्यूक्लियर मटीरियल स्टॉक की जानकारी देने और इंस्पेक्टरों को न्यूक्लियर साइट्स तक पहुंच देने की मांग की है.

बुधवार को पारित इस प्रस्ताव में कहा गया है कि जानकारी उपलब्ध कराना अनिवार्य है. IAEA यह सत्यापित करना चाहता है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम से किसी भी प्रकार का न्यूक्लियर मटीरियल डायवर्जन नहीं हो रहा है. IAEA मुख्यालय में बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की बैठक में 35 में से 21 सदस्य देशों ने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया. यह जानकारी बैठक से जुड़े राजनयिकों ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर दी.

रूस, चीन और नाइजर ने इस प्रस्ताव का विरोध किया, जबकि 10 देशों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया. एक सदस्य देश बकाया भुगतान के कारण वोट नहीं कर सका. यह प्रस्ताव फ्रांस, UK, जर्मनी और US द्वारा संयुक्त रूप से पेश किया गया था. एक वरिष्ठ पश्चिमी राजनयिक ने कहा कि इस प्रस्ताव का उद्देश्य ईरान पर कूटनीतिक दबाव बनाए रखना है ताकि परमाणु निगरानी संबंधी जिम्मेदारियों का पालन करे. 

यह प्रस्ताव ऐसे समय में पारित हुआ है जब पूरे मिडिल ईस्ट में हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं. अमेरिका ने बुधवार सुबह ईरान के खिलाफ एयरस्ट्राइक की है, जबकि तेहरान ने क्षेत्र के कई देशों की दिशा में जवाबी फायरिंग की है. बढ़ते सैन्य टकराव ने युद्ध समाप्त करने की कोशिशों को भी खतरे में डाल दिया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही ईरान को भारी कीमत चुकाने की चेतावनी दे चुके हैं.

पिछले साल जून में इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरान की न्यूक्लियर साइट्स पर किए गए हमलों के बाद से स्थिति और जटिल हो गई है. 12 दिनों तक चले उस संघर्ष के बाद ईरान ने IAEA इंस्पेक्टरों को उन परमाणु स्थलों तक पहुंच नहीं दी है, जो हमलों से प्रभावित हुए थे. हालांकि न्यूक्लियर नॉन-प्रोलिफरेशन ट्रीटी (NPT) के तहत ईरान कानूनी रूप से IAEA के साथ सहयोग करने के लिए बाध्य है.

IAEA का कहना है कि वह जून 2025 के हमलों के बाद से ईरान के हथियार-ग्रेड यूरेनियम भंडार की वास्तविक स्थिति की पुष्टि नहीं कर पाया है. उसके अनुसार, ईरान के पास 60 प्रतिशत शुद्धता तक संवर्धित 440.9 किलोग्राम यूरेनियम मौजूद है. 90 प्रतिशत हथियार-ग्रेड संवर्धन से केवल एक तकनीकी कदम दूर माना जाता है. यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता लगातार बढ़ रही है.

एसोसिएटेड प्रेस (AP) को दिए इंटरव्यू में IAEA के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी ने चेतावनी दी थी कि यदि ईरान अपने कार्यक्रम को सैन्य दिशा में ले जाने का फैसला करता है, तो यह यूरेनियम भंडार लगभग 10 परमाणु बम बनाने के लिए पर्याप्त हो सकता है. हालांकि ग्रॉसी ने यह भी स्पष्ट किया था कि इसका यह अर्थ नहीं है कि ईरान के पास वर्तमान में कोई परमाणु हथियार मौजूद है.

दूसरी ओर ईरान दावा करता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और वह परमाणु हथियार विकसित नहीं कर रहा. तेहरान का कहना है कि उसकी परमाणु गतिविधियां ऊर्जा, चिकित्सा अनुसंधान और वैज्ञानिक विकास जैसे क्षेत्रों तक सीमित हैं. नए प्रस्ताव में IAEA ने पिछले 12 महीनों के दौरान अपने दायित्वों का पालन करने में ईरान की विफलता पर गहरा अफसोस जताया है.

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