जहांआरा और मुमताज… क्या है लिंकेज डॉक्यूमेंट जिसके बिना विदेशी घोषित हो गईं असम की दो महिलाएं – assam nagaon two women declared foreigners sent to transit camp citizenship document dispute ntcpvp


असम के नगांव जिले की दो महिलाओं को विदेशी घोषित कर गोलपाड़ा स्थित ट्रांजिट कैंप भेज दिया गया है. अधिकारियों ने रविवार को इसकी पुष्टि की. दोनों महिलाओं ने खुद को भारतीय नागरिक बताया है, लेकिन वे अपनी नागरिकता साबित करने के लिए जरूरी दस्तावेज नहीं दिखा सकीं. 

जानकारी के अनुसार, बगरीगोरी गांव की जहानारा बेगम और दगांव की मुमताज बेगम के पास उनके माता-पिता के वैलिड डॉक्यूमेंट मौजूद थे. हालांकि, वे ऐसे डॉक्यूमेंट नहीं दिखा सकीं जिनसे उनके और उनके माता-पिता के बीच संबंध (लिंकेज) स्थापित हो सके. अधिकारियों का कहना है कि दोनों महिलाओं के पास जन्म प्रमाणपत्र और शैक्षणिक प्रमाणपत्र जैसे दस्तावेज नहीं थे. इसके बजाय उन्होंने गांव के मुखिया (हेडमैन) द्वारा जारी प्रमाणपत्र पेश किए, जिन्हें विदेशी न्यायाधिकरण ने स्वीकार नहीं किया.

साल 2019 में भी विदेशी घोषित किया गया था

जहानारा बेगम की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता जाहिदुल हक ने बताया कि दोनों महिलाओं को पहली बार साल 2019 में जुरिया विदेशी न्यायाधिकरण (फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल) ने विदेशी घोषित किया था. इसके खिलाफ दोनों ने अलग-अलग याचिकाएं दायर कर गोहाटी हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था.

हक ने कहा कि 24 अप्रैल को गोहाटी हाईकोर्ट ने अपने आदेश में मामले को दोबारा समीक्षा के लिए जुरिया फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल को वापस भेज दिया था. अदालत ने माना था कि 2019 के फैसले में उपलब्ध साक्ष्यों और दस्तावेजों पर पर्याप्त चर्चा नहीं की गई थी. इसी आधार पर पुराने आदेश को रद्द करते हुए मामले पर पुनर्विचार का निर्देश दिया गया था. हालांकि, पुनर्विचार के बाद भी ट्रिब्यूनल ने दोनों महिलाओं को विदेशी घोषित कर दिया. वकील के अनुसार, परिवार के वैध दस्तावेज होने के बावजूद वे जरूरी दस्तावेज पेश नहीं कर सकीं. इसके बाद पिछले सप्ताह प्रशासन ने दोनों को गोलपाड़ा ट्रांजिट कैंप भेज दिया.

महिलाओं के पास नहीं हैं शैक्षणिक प्रमाण पत्र

जाहिदुल हक ने कहा कि दोनों महिलाएं अशिक्षित हैं, इसलिए उनके पास शैक्षणिक प्रमाणपत्र नहीं हैं. साथ ही उनके जन्म प्रमाणपत्र भी उपलब्ध नहीं हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रिब्यूनल ने गांव के मुखिया द्वारा जारी प्रमाणपत्रों को खारिज कर दिया और विस्तृत सुनवाई किए बिना नया आदेश पारित कर दिया.

इस बीच सदाओ असोम ग्रामीण श्रमिक संस्था (SAGSS) और गणतंत्र सुरक्षा मंच (GSM) ने आरोप लगाया है कि फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल ने गोहाटी हाईकोर्ट के आदेश की भावना की अनदेखी करते हुए दोनों महिलाओं को ट्रांजिट कैंप भेज दिया. वकील ने कहा कि अब इस फैसले के खिलाफ उपलब्ध सभी कानूनी विकल्पों पर विचार किया जा रहा है.

क्या है लिंकेज डॉक्यूमेंट?
नागरिकता संबंधी मामलों में लिंकेज डॉक्यूमेंट ऐसे दस्तावेज हैं, जो किसी व्यक्ति और उसके माता-पिता या पूर्वजों के बीच संबंध साबित करते हैं. इसमें जन्म प्रमाणपत्र, शैक्षणिक प्रमाणपत्र, परिवार रजिस्टर या अन्य सरकारी रिकॉर्ड शामिल होते हैं. असम में विदेशी न्यायाधिकरणों के समक्ष नागरिकता साबित करने के लिए विरासत संबंधी दस्तावेजों के साथ ऐसे लिंकेज दस्तावेज भी महत्वपूर्ण माने जाते हैं.

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