लाहौर में जन्मा आजाद भारत का पहला ‘विलेन’, भगत सिंह संग अंग्रेजों को भगाया-बॉलीवुड से मिली पहचान – independence day special bollywood first iconic lahore born villain hiralal fought with bhagat singh tmovj


भारत को अंग्रेजों से आजाद हुए आज 79 साल पूरे हो चुके हैं. देशभर में इस 80वें स्वतंत्रता दिवस को लेकर पूरा जोश और जुनून भी नजर आ रहा है. बॉलीवुड के कई सेलेब्स इस खास दिन अपने घरों के बाहर तिरंगा झंडा भी लहराने वाले हैं. इस मौके पर हम आपके लिए एक खास कहानी लाए हैं, जो आजाद भारत के बाद बॉलीवुड में आए कलाकारों से जुड़ी हैं. 

बॉलीवुड का पहला विलेन

बॉलीवुड में पिछले 100 से भी ज्यादा सालों से कई सारे कलाकार आए जिन्होंने विलेन की भूमिका निभाकर अपनी अमिट छाप छोड़ी. लेकिन आजाद हिंदुस्तान के बाद, जिस कलाकार ने पहली बार विलेन का रोल निभाया उसके बारे में बहुत कम ही लोग जानते होंगे. वो एक समय पर इंडस्ट्री में कई डायरेक्टर्स के लकी चार्म भी माने जाते थे क्योंकि उनके आने से फिल्म खूब चलती थीं. उस महान हस्ती का नाम हीरालाल ठाकुर था, जिन्होंने साइलेंट फिल्मों से लेकर टॉकीज फिल्मों तक अपना सफर जारी रखा और खूब सफलता हासिल की. 

कैसे हुई हीरालाल की शुरुआत?

फिल्मों में आने से पहले, हीरालाल ठाकुर भारत देश के गौरव वीर भगत सिंह संग आजादी की लड़ाई भी लड़ चुके थे. मात्र 14 साल की उम्र में ही उन्होंने कांग्रेस जॉइंन की, जिसके बाद वो भगत सिंह और लाला लाजपत राय से जुड़े. अंग्रेजों को भगाने की लड़ाई से पहले, उनका फिल्मी दुनिया के प्रति दिलचस्पी काफी ज्यादा थी. बचपन से ही वो एक्टिंग किया करते थे. इसलिए उन्होंने अपना फिल्मी सफर 1928 में शुरू किया. शंकरदेव आर्या की फिल्म डॉटर्स ऑफ टुडे से उनका डेब्यू हुआ. 

फिल्ममेकर्स के रहे लकी चार्म

कहा जाता है कि इस फिल्म से पाकिस्तानी सिनेमा की भी शुरुआत हुई थी. इसके बाद, हीरालाल 1930 में आई सफदर जंग फिल्म में नजर आए, जो बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट रही और इससे उनका नाम बतौर एक्टर और भी बड़ा बन गया. 1947 में आजादी से पहले तक, हीरालाल करीब 19-20 फिल्में कर चुके थे, जिसमें उन्होंने विलेन की ही भूमिका निभाई. ये वो दौर था जब फिल्ममेकर्स उन्हें अपना लकी चार्म मानने लगी. क्योंकि जिस फिल्म में वो विलेन बनते, वो फिल्म चल जाती थी. 

बंटवारे के बाद इंडिया में आए

हीरालाल ठाकुर का जन्म लाहौर 1912 में हुआ था, जो आज के समय में पाकिस्तान में स्थित है. 1947 में भारत देश दो हिस्सों में बंट गया. वो लाहौर छोड़कर इंडिया आ गए, कहा जाता है कि वो कोलकाता के रास्ते बॉम्बे आए थे और फिर अपनी पत्नी दर्पण रानी के साथ वहीं बस गए. 1951 में उन्होंने बॉलीवुड फिल्म बादल में काम किया, जिसमें वो बतौर विलेन ही नजर आए. आजाद भारत के बाद, ये उनकी पहली फिल्म बतौर विलेन थी. इसके बाद हीरालाल ने कई हिंदी फिल्मों में काम किया, जो सुपरहिट रहीं. 

पांच दशक किया काम, गरीबी देखकर तोड़ा दम

अपने पांच दशक जितने लंबे करियर में उन्होंने डेढ़ सौ से ज्यादा फिल्मों में काम किया, जिनमें ज्यादातर बॉक्स ऑफिस पर चलीं. हीरालाल और उनकी पत्नी दर्पण रानी ने छह बच्चों को जन्म दिया था, जिसमें से पांच बेटे और एक बेटी थी. उनकी आखिरी फिल्म 1981 में अमिताभ बच्चन की कालिया थी, जिसके बाद उनका निधन हो गया. हैरानी की बात ये है कि जिस एक्टर ने फिल्मों में इतने आइकॉनिक किरदार निभाए, 50 सालों तक एक इंडस्ट्री में काम किया, उन्हें जाते हुए गरीबी देखनी पड़ी. अंतिम समय में हीरालाल के पास बिल्कुल पैसे नहीं बचे थे. 

—- समाप्त —-


Leave a Comment