‘भारत ने कभी भी विदेश से आया फरमान नहीं माना’, पुतिन ने ट्रंप को दिया मैसेज – Russian president putin SPIEF 2026 Plenary Session in St Petersburg india trump Ukraine ntcppl


रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन ने कहा है कि भारत ने कभी भी अपनी सीमाओं के बाहर से मिले आदेशों का पालन नहीं किया है. पुतिन का ये बयान तब आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप नई दिल्ली पर दबाव बना रहे हैं कि भारत मॉस्को के साथ व्यापारिक रिश्तों में कटौती करे. पुतिन के इस बयान को ट्रंप समेत अमेरिकी प्रतिष्ठान को रूस की ओर से दो टूक जवाब माना जा रहा है.

सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम (SPIEF’26) में बोलते हुए रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने स्पष्ट कहा कि संप्रभुता और स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता पर कभी भी सवाल नहीं उठाया जा सकता. 

SPIEF’26 रूस का प्रमुख वार्षिक आर्थिक मंच है. इसमें दुनिया के 130 देशों के बीस हजार प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं. SPIEF’26 में शुक्रवार के कार्यक्रम का संचालन इंडिया टुडे ग्रुप की फॉरेन अफेयर्स एडिटर गीता मोहन ने किया. 

कार्यक्रम के दौरान जब पुतिन से रूस के आर्थिक रूप से अलग-थलग पड़ने के बारे में सवाल पूछा गया तो राष्ट्रपति ने कहा, “स्वाभाविक रूप से, भारत, जिसने कभी भी विदेश से आए किसी आदेश का पालन नहीं किया है, या पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ़ चाइना. संप्रभुता और संप्रभु निर्णय लेने की क्षमता पर कभी सवाल नहीं उठाया जा सकता.”

इससे पहले SPIEF’26 को संबोधित करते हुए पुतिन ने कहा कि भारत दुनिया की आईटी इंडस्ट्री का अहम साझीदार और बड़े खिलाड़ियों में से एक है.  

SPIEF’26 पुतिन का दावोस (Davos) को जवाब माना जा रहा है. दावोस में अमेरिका और यूरोपीय देशों की अगुआई में आर्थिक सम्मेलन का आयोजन किया जाता रहा है. 

इससे पहले रूसी राष्ट्रपति ने कहा था कि रूस के साथ संबंधों को लेकर भारत पर दबाव बनाने की कोशिशें ‘बेकार’ हैं. उन्होंने कहा था कि मॉस्को का भरोसेमंद साथी भारत पश्चिमी देशों के दबाव के आगे नहीं झुकेगा. 

SPIEF’26 को इंडिया टुडे ग्रुप की फॉरेन अफेयर्स एडिटर गीता मोहन ने मॉडरेट किया. (Photo: AFP)

भारत लंबे समय से अपनी स्वतंत्र विदेश नीति पर गर्व करता रहा है. हालांकि पिछले साल रूसी तेल खरीदने को लेकर भारत को ट्रंप के दबाव का सामना करना पड़ा था. अमेरिका दावा करता है कि इससे मिलने वाली कमाई से मॉस्को को यूक्रेन के खिलाफ युद्ध चलाने में मदद मिल रही थी. 

‘रूस को अलग-थलग करने की कोशिशें नाकाम रहीं’

जब पुतिन से पूछा गया कि क्या रूस को आर्थिक रूप से अलग-थलग कर दिया गया है, तो उन्होंने कहा कि ऐसी कोशिशें नाकाम रही हैं और मॉस्को दुनिया भर के देशों के साथ मज़बूत संबंध बनाए हुए है.

रूस को आर्थिक रूप से अलग-थलग करने की पश्चिम की कोशिशों पर प्रतिक्रिया देते हुए पुतिन ने कहा कि ‘एक मज़बूत और संप्रभु देश खुद को अलग-थलग या बंद नहीं किया जा सकता. हमें अपने विदेशी साझेदारों के साथ संबंध बनाने, सहयोग स्थापित करने और सीमा-पार की परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की जरूरत है. हम अपनी सड़कों और रेलमार्गों के विस्तार की योजनाओं पर काम करना जारी रखेंगे.” 

पुतिन ने साफ तौर पर कहा कि रूस को अलग-थलग करने की नीति पिछली अमेरिकी सरकार ने शुरू की थी और बाद में यूरोपीय देशों ने इसका समर्थन किया था. हालांकि, उन्होंने कहा कि यह रणनीति नाकाम रही. 

पुतिन ने कहा कि वे कभी भी हमें अलग-थलग नहीं कर सके. 

पुतिन ने कहा कि तनाव के बावजूद कई क्षेत्रों में रूस और पश्चिमी देशों के बीच आर्थिक सहयोग जारी रहा. उन्होंने ऊर्जा परियोजनाओं और अमेरिका को यूरेनियम के निर्यात का उदाहरण दिया.

पुतिन ने कहा, “अमेरिकी लोग व्यावहारिक होते हैं. जब भी उन्हें फ़ायदा होता है, सहयोग जारी रहता है.”

पुतिन ने यह भी दावा किया कि जिन देशों ने आधिकारिक तौर पर रूसी परियोजनाओं को हटाने की घोषणा की थी, वे अब भी इन प्रोजेक्ट में शामिल हैं, खासकर रूस के सुदूर पूर्व में एनर्जी सेक्टर से जुड़े कामों में. 

रूसी राष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया कि मास्को अपने सहयोगियों, पड़ोसियों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ मिलकर काम करना जारी रखे हुए है. उन्होंने कहा, “हमें ज़्यादा नुकसान नहीं हुआ है. हमने कभी भी खुद को किसी से दूर नहीं किया है.”

रूसी अर्थव्यवस्था के बारे में पुतिन ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि रूस निवेशकों के लिए आकर्षक बना रहेगा. 

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