‘मैंने अपनी कार बेच दी थी. मेरे पास आखिरी गाड़ी ‘इको कार’ थी, जिसे मैंने आखिरकार नासिक में अपने किसानों को सौंप दिया था, क्योंकि मैं उन्हें पैसे नहीं दे पा रहा था. मैं बहुत कठिन दौर से गुजरा हूं. लेकिन इस सब के बावजूद, मैंने कभी खुद को डिप्रेशन, चिंता या किसी भी तरह की निगेटिविटी में डूबने नहीं दिया.’