Coca-Cola Tension: ₹11-40 के फेर में उलझी कोका-कोला, CFO बोले- ये बड़ा संकट… – Coca Cola Rs 11 or 40 problem beverage giant is losing market share in India tutc


अगर छोटी दुकानों पर देखें, तो एक बात सामने आती है कि कई ग्राहक किसी खास बोतल के आकार के बारे में नहीं पूछते, बल्कि वे अपने बजट के हिसाब से ड्रिंक की डिमांड करते हैं. इनमें 20 रुपये, 30 रुपये या 40 रुपये प्राइस अक्सर खरीदारी में आगे रहता है. लेकिन, कोका-कोला कंपनी की ओर से खुद ये कहा जा रहा है कि वह इसी सेक्टर में पिछड़ती जा रही है और 11-40 के फेर में उलझकर परेशान हो रही है. 

भारत में घट रहा मार्केट शेयर
Coca-Cola ने खुद इस बात को स्वीकार किया है कि अप्रैल-जून तिमाही के दौरान भारत में उसकी बाजार हिस्सेदारी (Coca-Cola Market Share In India) में गिरावट आई है. कंपनी ने इसका प्रमुख कारण पैकेजिंग की बढ़ती लागत तो बताई ही है, इसके साथ ही ये भी कहा है कि महत्वपूर्ण रूप से 11-40 रुपये के मूल्य वर्ग में सही उत्पाद पोर्टफोलियो में न होना इस गिरावट का बड़ा कारण बन रहा है. 

11-40 रुपये का अंतर बड़ी परेशानी
रॉयटर्स को दिए एक इंटरव्यू में कोका-कोला के मुख्य वित्तीय अधिकारी (Coca-Cola CFO) जॉन मर्फी ने कहा कि कंपनी के पास फिलहाल 11-40 रुपये की कैटेगरी में सही पैकेज वैल्यू इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं है. उन्होंने आगे कहा कि यह एक ऐसा प्राइस सेगमेंट है, जो खासतौर पर भारतीय उपभोक्ताओं के एक बड़े वर्ग की जरूरतों को पूरा करता है. 

मर्फी के मुताबिक, हम इस पर काम कर रहे हैं, इसलिए मुझे उम्मीद है कि समय के साथ हम बाजार में हुए नुकसान की कुछ हद तक भरपाई कर लेंगे.उन्होंने ये भी स्वीकार किया कि इस तिमाही के दौरान कोका-कोला की बाजार हिस्सेदारी में गिरावट आई है.

Coca-Cola पर दबाव क्यों है?
कोका कोला कंपनी पर दबाव के बड़े कारणों की बात करें, तो इस साल एल्युमीनियम और PET प्लास्टिक की कीमतों में हुई तेज बढ़ोतरी सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है. इस बढ़ती लागत के कारण ही कंपनी को पूरे भारत में अपने प्रोडक्ट्स की कीमतों में बढ़ोतरी करनी पड़ी है.

कंपनी की ओर से मिडिल ईस्ट में अमेरिका-ईरान के बीच युद्ध के टेंशन का हवाला देते हुए कहा गया है कि एल्युमीनियम के डिब्बों की आपूर्ति में भी रुकावट आ रही है. इस साल की शुरुआत में ईरान संघर्ष के कारण होर्मुज स्ट्रेट से आपूर्ति बाधित होने और एल्युमीनियम के डिब्बों की कमी के बाद स्थिति और भी गंभीर हो गई है. हालांकि, कमी को पूरा करने के लिए साउथ ईस्ट एशिया से आयात किया जा रहा है. 

कोका-कोला का प्रमुख बाजार भारत
हालिया झटके के बावजूद, कोका-कोला भारत में अपनी लॉन्गटर्म संभावनाओं को लेकर आशावादी है. कंपनी ने ग्लोबल स्तर पर उम्मीद से बेहतर तिमाही इनकम दर्ज की और फीफा विश्व कप से जुड़े मजबूत विज्ञापन अभियानों की मदद से अपने पूरे वर्ष के पूर्वानुमान को भी बढ़ाया है.

फिलहाल, कंपनी को उम्मीद है कि 11-40 रुपये के सेगमेंट में अपनी मूल्य निर्धारण और पैकेजिंग स्ट्रेटजी को ठीक करने से उसे अपने सबसे तेजी से बढ़ते बाजारों में से एक में ग्राहकों को वापस लाने में मदद मिलेगी. 

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