फर्जी FMG सर्टिफिकेट से बनते थे ‘नकली डॉक्टर’, राजस्थान SOG ने दिल्ली से दबोचा मास्टरमाइंड, 29वीं गिरफ्तारी – rajasthan sog cracks fake fmg certificate racket delhi man arrested edmm


राजस्थान स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप ने विदेश से एमबीबीएस करने वाले डॉक्टरों को भारत में प्रैक्टिस का रास्ता दिखाने के नाम पर फर्जीवाड़े का बड़ा नेटवर्क चलाने वाले गिरोह पर एक और बड़ा प्रहार किया है. राजस्थान मेडिकल काउंसिल में फेक FMG स्क्रीनिंग परीक्षा के प्रमाण-पत्रों के आधार पर पंजीकरण कराने के मामले में दिल्ली निवासी एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है. जांच में सामने आया है कि आरोपी विदेशी डॉक्टरों से लाखों रुपये लेकर फर्जी दस्तावेज तैयार करवाता था और उन्हें भारत में डॉक्टर के रूप में पंजीकरण दिलाने का इंतजाम करता था.

एसओजी के अनुसार इस पूरे मामले में एसओजी थाना जयपुर में पहले से दर्ज मुकदमे की जांच के दौरान यह गिरफ्तारी की गई है. मामले की जांच में खुलासा हुआ कि विदेश से एमबीबीएस करने वाले ऐसे लोग, जो भारत में प्रैक्टिस करने के लिए अनिवार्य FMG स्क्रीनिंग परीक्षा पास नहीं कर पाए थे, उनके नाम से कूटरचित प्रमाण-पत्र तैयार कर राजस्थान मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण कराया गया.

जांच में सामने आया कि राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान संस्थान द्वारा आयोजित FMG स्क्रीनिंग परीक्षा में असफल रहने वाले विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट्स को गिरोह ने आसान रास्ता दिखाया. फर्जी परीक्षा प्रमाण-पत्र तैयार कर राजस्थान मेडिकल काउंसिल में उनका रजिस्ट्रेशन कराया गया, जिससे वे भारत में डॉक्टर के रूप में प्रैक्टिस कर सकें.एसओजी का कहना है कि इस संगठित गिरोह ने अब तक कई विदेशी नागरिकों को इस तरह फर्जी दस्तावेजों के जरिए लाभ पहुंचाया है.

जांच के दौरान पुलिस ने मुलजिम नितिन कुमार को गिरफ्तार किया. आरोपी को दस्तयाब करने के बाद विस्तृत पूछताछ की गई, जिसमें फर्जीवाड़े से जुड़े कई अहम खुलासे हुए हैं. एसओजी के अनुसार वर्ष 2022 में कजाकिस्तान से एमबीबीएस कर भारत लौटे एक डॉक्टर से आरोपी की पहचान हुई. इसके बाद उसने अपने साथी शुभम गुर्जर के माध्यम से करीब 10 लाख रुपये लेकर फर्जी FMG स्क्रीनिंग सर्टिफिकेट तैयार करवाया और राजस्थान मेडिकल काउंसिल में उसका पंजीकरण करवा दिया.

एसओजी की जांच में अब तक इस फर्जीवाड़े से जुड़े 29 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है. इनमें राजस्थान मेडिकल काउंसिल के तत्कालीन रजिस्ट्रार, पूर्व अध्यक्ष, एलडीसी, मुख्य आरोपी और गिरोह के अन्य सदस्य भी शामिल हैं. जांच एजेंसियों के अनुसार गिरोह के सदस्य फर्जी प्रमाण-पत्र तैयार करने और राजस्थान मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन कराने के लिए प्रति व्यक्ति 20 से 30 लाख रुपये तक वसूलते थे. एसओजी के मुताबिक अब तक फर्जी प्रमाण-पत्रों के आधार पर पंजीकरण कराने वाले 24 विदेशी डॉक्टरों की पहचान की जा चुकी है. सभी मामलों की गहन जांच जारी है और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश की जा रही है.

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