ईरान ने यूरोपीय देशों को नहीं भेजा खामेनेई के जनाजे का न्योता, कहा- वे गलत तरफ खड़े – iran denies funeral invitation to european countries khamenei ntc dhrj


ईरान ने पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के जनाजे में यूरोपीय देशों को बुलाने से साफ इनकार कर दिया है. ईरान के विदेश मंत्रालय के मुताबिक जो देश इतिहास के गलत पन्ने पर खड़े हैं, उन्हें इस जनाजे का न्योता नहीं मिल सकता. इसे ईरान का सख्त राजनीतिक संदेश माना जा रहा है. अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के करीब 133 दिन बाद 4 जुलाई से उनके जनाजे की रस्में शुरू होंगी.

ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, विदेश मंत्रालय ने कहा कि अयातुल्ला अली खामेनेई के जनाजे के लिए किसी भी यूरोपीय देश को आधिकारिक निमंत्रण नहीं भेजा गया है. मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि जो देश इतिहास के गलत पक्ष में खड़े हैं, उन्हें इस समारोह में शामिल होने का सम्मान नहीं मिलेगा.

बता दें कि अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजराइल के एक संयुक्त हवाई हमले में हुई थी. इस एयरस्ट्राइक में तेहरान स्थित उनके परिसर को निशाना बनाया गया था, जिसमें परिवार के सदस्यों की भी जान चली गई थी.

4 जुलाई से शुरू होंगी जनाजे की रस्में

ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, अयातुल्ला अली खामेनेई के जनाजे की रस्में 4 जुलाई से शुरू होंगी. 9 जुलाई को उन्हें मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा. उनकी मौत के करीब 133 दिन बाद उन्हें दफनाया जाएगा. इस दौरान बड़ी संख्या में लोगों और कई देशों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है. विदेश मंत्रालय का यह बयान ऐसे समय आया है, जब खामेनेई के जनाजे की तैयारियां अंतिम दौर में हैं.

बता दें कि ईरान के आयतुल्ला अली खामेनेई के जनाजे में भारत के दो प्रतिनिधि शामिल होंगे. इनमें विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा और बिहार के गवर्नर लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन का नाम शामिल है. दोनों भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए जनाजे में मौजूद रहेंगे.

ईरान के इस फैसले से साफ है कि वह पश्चिमी और यूरोपीय देशों की नीतियों से काफी नाराज है. विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में जिस तरह ‘इतिहास के गलत तरफ खड़े होने’ की बात कही है, वह यह दिखाता है कि ईरान ग्लोबल पॉलिटिक्स में झुकेगा नहीं. 
 

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